हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों में Saptamukha Hanuman (सात मुखी हनुमान) का स्वरूप अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जहाँ पंचमुखी हनुमान पाँच दिशाओं की रक्षा करते हैं, वहीं सप्तमुख हनुमान सात दिशाओं और सात ग्रहों के अशुभ प्रभावों से भक्त की रक्षा करते हैं।
यदि आप अपने जीवन में Ultimate Protection, शत्रुओं पर विजय और असाध्य रोगों से मुक्ति चाहते हैं, तो Shri Saptamukha Hanuman Kavacham का पाठ आपके लिए एक Divine Shield (दिव्य रक्षा कवच) साबित होगा।
श्री सप्तमुख हनुमत् कवचम्
अस्य श्रीसप्तमुखवीरहनुमत्कवच स्तोत्रमन्त्रस्य, नारद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीसप्तमुखीकपिः परमात्मा देवता, ह्रां बीजं, ह्रीं शक्तिः, ह्रूं कीलकं, मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥
करन्यासः –
ओं ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ओं ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ओं ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ओं ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ओं ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ओं ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥
अङ्गन्यासः –
ओं ह्रां हृदयाय नमः ।
ओं ह्रीं शिरसे स्वाहा ।
ओं ह्रूं शिखायै वषट् ।
ओं ह्रैं कवचाय हुम् ।
ओं ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ओं ह्रः अस्त्राय फट् ॥
ध्यानम् –
वन्देवानरसिंहसर्परिपुवाराहाश्वगोमानुषैर्युक्तं
सप्तमुखैः करैर्द्रुमगिरिं चक्रं गदां खेटकम् ।
खट्वाङ्गं हलमङ्कुशं फणिसुधाकुम्भौ शराब्जाभयान्
शूलं सप्तशिखं दधानममरैः सेव्यं कपिं कामदम् ॥
ब्रह्मोवाच ।
सप्तशीर्ष्णः प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिदम् ।
जप्त्वा हनुमतो नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥ १ ॥
सप्तस्वर्गपतिः पायाच्छिखां मे मारुतात्मजः ।
सप्तमूर्धा शिरोऽव्यान्मे सप्तार्चिर्भालदेशकम् ॥ २ ॥
त्रिःसप्तनेत्रो नेत्रेऽव्यात् सप्तस्वरगतिः श्रुती ।
नासां सप्तपदार्थोऽव्यान्मुखं सप्तमुखोऽवतु ॥ ३ ॥
सप्तजिह्वस्तु रसनां रदान् सप्तहयोऽवतु ।
सप्तच्छदो हरिः पातु कण्ठं बाहू गिरिस्थितः ॥ ४ ॥
करौ चतुर्दशकरो भूधरोऽव्यान्ममाङ्गुलीः ।
सप्तर्षिध्यातो हृदयमुदरं कुक्षिसागरः ॥ ५ ॥
सप्तद्वीपपतिश्चित्तं सप्तव्याहृतिरूपवान् ।
कटिं मे सप्तसंस्थार्थदायकः सक्थिनी मम ॥ ६ ॥
सप्तग्रहस्वरूपी मे जानुनी जङ्घयोस्तथा ।
सप्तधान्यप्रियः पादौ सप्तपातालधारकः ॥ ७ ॥
पशून् धनं च धान्यं च लक्ष्मीं लक्ष्मीप्रदोऽवतु ।
दारान् पुत्रांश्च कन्याश्च कुटुम्बं विश्वपालकः ॥ ८ ॥
अनुक्तस्थानमपि मे पायाद्वायुसुतः सदा ।
चौरेभ्यो व्यालदंष्ट्रिभ्यः शृङ्गिभ्यो भूतराक्षसात् ॥ ९ ॥
दैत्येभ्योऽप्यथ यक्षेभ्यो ब्रह्मराक्षसजाद्भयात् ।
दंष्ट्राकरालवदनो हनुमान् मां सदाऽवतु ॥ १० ॥
परशस्त्रमन्त्रयन्त्रतन्त्राग्निजलविद्युतः ।
रुद्रांशः शत्रुसङ्ग्रामात् सर्वावस्थासु सर्वभृत् ॥ ११ ॥
ओं नमो भगवते सप्तवदनाय आद्य कपिमुखाय वीरहनुमते सर्वशत्रुसंहारणाय ठण्ठण्ठण्ठण्ठण्ठण्ठं ओं नमः स्वाहा ॥ १२ ॥
ओं नमो भगवते सप्तवदनाय द्वितीय नारसिंहास्याय अत्युग्रतेजोवपुषे भीषणाय भयनाशनाय हंहंहंहंहंहंहं ओं नमः स्वाहा ॥ १३ ॥
ओं नमो भगवते सप्तवदनाय तृतीय गरुडवक्त्राय वज्रदंष्ट्राय महाबलाय सर्वरोगविनाशाय मंमंमंमंमंमंमं ओं नमः स्वाहा ॥ १४ ॥
ओं नमो भगवते सप्तवदनाय चतुर्थ क्रोडतुण्डाय सौमित्रिरक्षकाय पुत्राद्यभिवृद्धिकराय लंलंलंलंलंलंलं ओं नमः स्वाहा ॥ १५ ॥
ओं नमो भगवते सप्तवदनाय पञ्चम अश्ववदनाय रुद्रमूर्तये सर्ववशीकरणाय सर्वागमस्वरूपाय रुंरुंरुंरुंरुंरुंरुं ओं नमः स्वाहा ॥ १६ ॥
ओं नमो भगवते सप्तवदनाय षष्ठ गोमुखाय सूर्यस्वरूपाय सर्वरोगहराय मुक्तिदात्रे ओंओंओंओंओंओंओं ओं नमः स्वाहा ॥ १७ ॥
ओं नमो भगवते सप्तवदनाय सप्तम मानुषमुखाय रुद्रावताराय अञ्जनीसुताय सकलदिग्यशोविस्तारकाय वज्रदेहाय सुग्रीवसाह्यकराय उदधिलङ्घनाय सीताशुद्धिकराय लङ्कादहनाय अनेकराक्षसान्तकाय रामानन्ददायकाय अनेकपर्वतोत्पाटकाय सेतुबन्धकाय कपिसैन्यनायकाय रावणान्तकाय ब्रह्मचर्याश्रमिणे कौपीनब्रह्मसूत्रधारकाय रामहृदयाय सर्वदुष्टग्रहनिवारणाय, शाकिनी डाकिनी वेताल ब्रह्मराक्षस भैरवग्रह यक्षग्रह पिशाचग्रह ब्रह्मग्रह क्षत्रियग्रह वैश्यग्रह शूद्रग्रहान्त्यजग्रह म्लेच्छग्रह सर्पग्रहोच्चाटकाय, मम सर्वकार्यसाधकाय सर्वशत्रुसंहारकाय सिंहव्याघ्रादि दुष्टसत्वाकर्षकाय एकाहिकादि विविधज्वरच्छेदकाय परयन्त्रमन्त्रतन्त्रनाशकाय सर्वव्याधिनिकृन्तकाय सर्पादि सर्वस्थावरजङ्गमविषस्तम्भनकराय सर्वराजभय चोरभय अग्निभय प्रशमनाय आध्यात्मिकाधिदैविकाधिभौतिक तापत्रयनिवारणाय सर्वविद्या सर्वसम्पत् सर्वपुरुषार्थदायकाय असाध्यकार्यसाधकाय सर्ववरप्रदाय सर्वाभीष्टकराय ओं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः ओं नमः स्वाहा ॥ १८ ॥
य इदं कवचं नित्यं सप्तास्यस्य हनूमतः ।
त्रिसन्ध्यं जपते नित्यं सर्वशत्रुविनाशनम् ॥ १९ ॥
पुत्रपौत्रप्रदं सर्वं सम्पद्राज्यप्रदं परम् ।
सर्वरोगहरं चायुःकीर्तिदं पुण्यवर्धनम् ॥ २० ॥
राजानं स वशं नीत्वा त्रैलोक्यविजयी भवेत् ।
इदं हि परमं गोप्यं देयं भक्तियुताय च ।
न देयं भक्तिहीनाय दत्वा स निरयं व्रजेत् ॥ २१ ॥
नामानिसर्वाण्यपवर्गदानि
रूपाणि विश्वानि च यस्य सन्ति ।
कर्माणि देवैरपि दुर्घटानि
तं मारुतिं सप्तमुखं प्रपद्ये ॥ २२ ॥
इति श्रीसुदर्शनसंहितायां श्री सप्तमुख हनुमत् कवचम् ॥
Shri Saptamukha Hanuman Kavacham PDF Download
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सप्तमुख हनुमान कवच क्या है? (Understanding Saptamukha Hanuman)
भगवान हनुमान के इस अद्भुत स्वरूप में सात मुख होते हैं, जो ब्रह्मांड की सात दिशाओं और सात शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। Shri Saptamukha Hanuman Kavacham एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसे ‘कवच’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह साधक के चारों ओर एक Invincible energy field तैयार कर देता है।

श्री सप्तमुख हनुमत् कवच के शक्तिशाली लाभ (Powerful Benefits)
इस कवच का नियमित पाठ करने से भक्तों को कई Spiritual and Physical benefits प्राप्त होते हैं:
- Destruction of Enemies: यह कवच न केवल बाहरी शत्रुओं बल्कि आंतरिक शत्रुओं (जैसे क्रोध, लोभ, मोह) का भी नाश करने में सक्षम है।
- Protection from Graha Dosha: सात मुखी स्वरूप सात मुख्य ग्रहों (Planets) के Negative impacts को शांत करने के लिए जाना जाता है।
- Success in Tough Tasks: यदि आपका कोई काम लंबे समय से अटका हुआ है, तो यह कवच Success and Growth के बंद रास्ते खोल देता है।
- Healing and Health: गंभीर बीमारियों और मानसिक अवसाद (Depression) से लड़ने के लिए यह एक Powerful healing prayer है।
पाठ करने की विधि और नियम (Puja Vidhi & Rituals)
Saptamukha Hanuman Kavacham की साधना में शुद्धता और अनुशासन का विशेष महत्व है:
- Preparation: ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में स्नान के बाद लाल या नारंगी (Saffron) रंग के वस्त्र पहनें।
- Seat: पूजा के लिए कुश के आसन या ऊनी कंबल का उपयोग करें।
- Offerings: हनुमान जी की प्रतिमा को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल (Hibiscus/Rose) अर्पित करें।
- Chanting: यदि संभव हो, तो इस कवच का पाठ कम से कम 7 बार करें। पाठ के दौरान मन में पूर्ण Faith and Devotion रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (5 Essential FAQs)
सप्तमुख हनुमान जी के सात मुख कौन-कौन से हैं?
इनके सात मुखों में वानर, नरसिंह, गरुड़, वराह, हयग्रीव, हनुमान और भैंरव स्वरूप समाहित हैं, जो अलग-अलग शक्तियों के प्रतीक हैं।
क्या घर में सप्तमुख हनुमान की फोटो रखना शुभ है?
जी हाँ, घर की दक्षिण दिशा (South direction) में सप्तमुख हनुमान की तस्वीर लगाने से Negative energy घर में प्रवेश नहीं करती और वास्तु दोष भी दूर होते हैं।
यह कवच अन्य हनुमान कवचों से अलग कैसे है?
यह कवच अधिक Comprehensive है। जहाँ एकमुख या पंचमुख कवच विशिष्ट बाधाओं के लिए हैं, वहीं सप्तमुख कवच सर्व-कार्य सिद्धि और Complete spiritual protection के लिए जाना जाता है।
क्या इसका पाठ रोज करना चाहिए?
पूर्ण लाभ के लिए इसे अपनी Daily Puja routine का हिस्सा बनाना चाहिए। यदि समय कम हो, तो मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ अवश्य करें।
क्या महिलाएं सप्तमुख हनुमत् कवच का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ इसका पाठ कर सकती हैं। यह उन्हें Mental strength और आत्मविश्वास (Confidence) प्रदान करता है।
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