Shri Hanumat Kavacham (Ananda Ramayane) 2 सनातन धर्म के महान ग्रंथों में Ananda Ramayana का एक विशेष स्थान है। इसी ग्रंथ के मनोहर कांड से उद्धृत Shri Hanumat Kavacham 2 (श्री हनुमत् कवचम् २) हनुमान जी की भक्ति का एक अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली स्रोत है।
अक्सर भक्त सामान्य हनुमान कवच का पाठ करते हैं, लेकिन Ananda Ramayane Hanumat Kavacham को उन लोगों के लिए अनिवार्य माना गया है जो जीवन में Complete Spiritual Transformation और भगवान राम की निकटता प्राप्त करना चाहते हैं। आइए जानते हैं इस अद्भुत कवच का महत्व, लाभ और पूजा विधि।
श्री हनुमत् कवचम् २ (श्रीमदानन्दरामायणे)
ओं अस्य श्री हनुमत्कवच स्तोत्रमहामन्त्रस्य श्री रामचन्द्र ऋषिः श्री हनुमान् परमात्मा देवता अनुष्टुप् छन्दः मारुतात्मजेति बीजं अञ्जनीसूनुरिति शक्तिः लक्ष्मणप्राणदातेति कीलकं रामदूतायेत्यस्त्रं हनुमान् देवता इति कवचं पिङ्गाक्षोऽमितविक्रम इति मन्त्रः श्रीरामचन्द्र प्रेरणया रामचन्द्रप्रीत्यर्थं मम सकलकामनासिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ।
अथ करन्यासः ।
ओं ह्रां अञ्जनीसुताय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ओं ह्रीं रुद्रमूर्तये तर्जनीभ्यां नमः ।
ओं ह्रूं रामदूताय मध्यमाभ्यां नमः ।
ओं ह्रैं वायुपुत्राय अनामिकाभ्यां नमः ।
ओं ह्रौं अग्निगर्भाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ओं ह्रः ब्रह्मास्त्रनिवारणाय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥
अङ्गन्यासः ।
ओं ह्रां अञ्जनीसुताय हृदयाय नमः ।
ओं ह्रीं रुद्रमूर्तये शिरसे स्वाहा ।
ओं ह्रूं रामदूताय शिखायै वषट् ।
ओं ह्रैं वायुपुत्राय कवचाय हुम् ।
ओं ह्रौं अग्निगर्भाय नत्रत्रयाय वौषट् ।
ओं ह्रः ब्रह्मास्त्रनिवारणाय अस्त्राय फट् ।
भूर्भुवःसुवरोमिति दिग्बन्धः ॥
अथ ध्यानम् ।
ध्यायेद्बालदिवाकरद्युतिनिभं देवारिदर्पापहं
देवेन्द्रप्रमुखं प्रशस्तयशसं देदीप्यमानं रुचा ।
सुग्रीवादिसमस्तवानरयुतं सुव्यक्ततत्त्वप्रियं
संरक्तारुणलोचनं पवनजं पीताम्बरालङ्कृतम् ॥ १ ॥
उद्यन्मार्तण्डकोटिप्रकटरुचियुतं चारुवीरासनस्थं
मौञ्जीयज्ञोपवीताभरणरुचिशिखं शोभितं कुण्डलाङ्गम् ।
भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनादप्रमोदं
ध्यायेद्देवं विधेयं प्लवगकुलपतिं गोष्पदीभूतवार्धिम् ॥ २ ॥
वज्राङ्गं पिङ्गकेशाढ्यं स्वर्णकुण्डलमण्डितम् ।
निगूढमुपसङ्गम्य पारावारपराक्रमम् ॥ ३ ॥
स्फटिकाभं स्वर्णकान्तिं द्विभुजं च कृताञ्जलिम् ।
कुण्डलद्वयसंशोभिमुखाम्भोजं हरिं भजे ॥ ४ ॥
सव्यहस्ते गदायुक्तं वामहस्ते कमण्डलुम् ।
उद्यद्दक्षिणदोर्दण्डं हनूमन्तं विचिन्तयेत् ॥ ५ ॥
अथ मन्त्रः ।
ओं नमो हनुमते शोभिताननाय यशोलङ्कृताय अञ्जनीगर्भसम्भूताय रामलक्ष्मणानन्दकाय कपिसैन्यप्रकाशन पर्वतोत्पाटनाय सुग्रीवसाह्यकरण परोच्चाटन कुमार ब्रह्मचर्य गम्भीर शब्दोदय ओं ह्रीं सर्वदुष्टग्रहनिवारणाय स्वाहा ॥
ओं नमो हनुमते एहि एहि एहि सर्वग्रहभूतानां शाकिनी डाकिनीनां विषमदुष्टानां सर्वेषामाकर्षयाकर्षय मर्दय मर्दय छेदय छेदय मर्त्यान् मारय मारय शोषय शोषय प्रज्वल प्रज्वल भूतमण्डल पिशाचमण्डल निरसनाय भूतज्वर प्रेतज्वर चातुर्थिकज्वर ब्रह्मराक्षस पिशाचच्छेदनाक्रिया विष्णुज्वर महेशज्वरान् छिन्धि छिन्धि भिन्धि भिन्धि अक्षिशूले शिरोऽभ्यन्तरे ह्यक्षिशूले गुल्मशूले पित्तशूले ब्रह्मराक्षसकुलप्रबल नागकुलविनिर्विषझटिति झटिति ओं ह्रीं फट् घेघे स्वाहा ।
ओं नमो हनुमते पवनपुत्र वैश्वानरमुख पापदृष्टि षोढादृष्टि हनुमते का आज्ञा फुरे स्वाहा । स्वगृहे द्वारे पट्टके तिष्ठ तिष्ठेति तत्र रोगभयं राजकुलभयं नास्ति तस्योच्चारणमात्रेण सर्वे ज्वरा नश्यन्ति ओं ह्रां ह्रीं ह्रूं घेघे स्वाहा ।
श्रीरामचन्द्र उवाच ।
हनूमान् पूर्वतः पातु दक्षिणे पवनात्मजः ।
पातु प्रतीच्यां रक्षोघ्नः पातु सागरपारगः ॥ १ ॥
उदीच्यामूर्ध्वगः पातु केसरीप्रियनन्दनः ।
अधस्तु विष्णुभक्तश्च पातु मध्यं तु पावनिः ॥ २ ॥
लङ्काविदाहकः पातु सर्वापद्भ्यो निरन्तरम् ।
सुग्रीवसचिवः पातु मस्तकं वायुनन्दनः ॥ ३ ॥
भालं पातु महावीरो भ्रुवोर्मध्ये निरन्तरम् ।
नेत्रे छायापहारी च पावनः प्लवगेश्वरः ॥ ४ ॥
कपोले कर्णमूले च पातु श्रीरामकिङ्करः ।
नासाग्रमञ्जनीसूनुः पातु वक्त्रं हरीश्वरः ॥ ५ ॥
वाचं रुद्रप्रियः पातु जिह्वां पिङ्गललोचनः ।
पातु देवः फाल्गुनेष्टश्चुबुकं दैत्यदर्पहा ॥ ६ ॥
पातु कण्ठं च दैत्यारिः स्कन्धौ पातु सुरार्चितः ।
भुजौ पातु महातेजाः करौ च चरणायुधः ॥ ७ ॥
नखान्नखायुधः पातु कुक्षौ पातु कपीश्वरः ।
वक्षो मुद्रापहारी च पातु पार्श्वे भुजायुधः ॥ ८ ॥
लङ्काविभञ्जनः पातु पृष्ठदेशे निरन्तरम् ।
नाभिं च रामदूतस्तु कटिं पात्वनिलात्मजः ॥ ९ ॥
गुह्यं पातु महाप्राज्ञो लिङ्गं पातु शिवप्रियः ।
ऊरू च जानुनी पातु लङ्काप्रासादभञ्जनः ॥ १० ॥
जङ्घे पातु कपिश्रेष्ठो गुल्फौ पातु महाबलः ।
अचलोद्धारकः पातु पादौ भास्करसन्निभः ॥ ११ ॥
अङ्गान्यमितसत्त्वाढ्यः पातु पादाङ्गुलीस्तथा ।
सर्वाङ्गानि महाशूरः पातु रोमाणि चात्मवित् ॥ १२ ॥
हनुमत्कवचं यस्तु पठेद्विद्वान्विचक्षणः ।
स एव पुरुषश्रेष्ठो भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥ १३ ॥
त्रिकालमेककालं वा पठेन्मासत्रयं नरः ।
सर्वान् रिपून् क्षणाज्जित्वा स पुमान् श्रियमाप्नुयात् ॥ १४ ॥
मध्यरात्रे जले स्थित्वा सप्तवारं पठेद्यदि ।
क्षयापस्मारकुष्टादितापत्रयनिवारणः ॥ १५ ॥
अश्वत्थमूलेऽर्कवारे स्थित्वा पठति यः पुमान् ।
अचलां श्रियमाप्नोति सङ्ग्रामे विजयं तथा ॥ १६ ॥
बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता ।
सुदार्ढ्यं वाक्स्फुरत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत् ॥ १७ ॥
मारणं वैरिणां सद्यः शरणं सर्वसम्पदाम् ।
शोकस्य हरणे दक्षं वन्दे तं रणदारुणम् ॥ १८ ॥
लिखित्वा पूजयेद्यस्तु सर्वत्र विजयी भवेत् ।
यः करे धारयेन्नित्यं स पुमाञ्छ्रियमाप्नुयात् ॥ १९ ॥
स्थित्वा तु बन्धने यस्तु जपं कारयति द्विजैः ।
तत्क्षणान्मुक्तिमाप्नोति निगडात्तु तथैव च ॥ २० ॥
य इदं प्रातरुत्थाय पठेच्च कवचं सदा ।
आयुरारोग्यसन्तानैस्तस्य स्तव्यः स्तवो भवेत् ॥ २१ ॥
इदं पूर्वं पठित्वा तु रामस्य कवचं ततः ।
पठनीयं नरैर्भक्त्या नैकमेव पठेत्कदा ॥ २२ ।
हनुमत्कवचं चात्र श्रीरामकवचं विना ।
ये पठन्ति नराश्चात्र पठनं तद्वृथा भवेत् ॥ २३ ॥
तस्मात्सर्वैः पठनीयं सर्वदा कवचद्वयम् ।
रामस्य वायुपुत्रस्य सद्भक्तैश्च विशेषतः ॥ २४ ॥
इति श्रीमदानन्दरामायणे श्रीरामकृतैकमुख हनुमत्कवचम् ।
Shri Hanumat Kavacham (Ananda Ramayane) 2 PDF Download
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आनंद रामायण हनुमत् कवच क्या है? (What is this Kavacham?)
आनंद रामायण के अनुसार, यह कवच स्वयं भगवान राम की शक्तियों का विस्तार है। Shri Hanumat Kavacham (Ananda Ramayane) को एक “Supernatural Armor” माना जाता है। इसमें हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों का आह्वान किया गया है, जो साधक की दसों दिशाओं, शरीर के अंगों और यहाँ तक कि उसके संकल्पों की भी रक्षा करते हैं।
यदि आप Black Magic, Psychological fear (मानसिक भय) या शत्रुओं के षड्यंत्र से सुरक्षा चाहते हैं, तो यह कवच एक Ultimate Shield की तरह काम करता है।
इस कवच पाठ के अद्भुत लाभ (Powerful Benefits)
नियमित रूप से इस Divine Prayer का पाठ करने से भक्तों को मिलने वाले लाभ निम्नलिखित हैं:
- Victory over Fear: यह कवच व्यक्ति के भीतर के अज्ञात भय और Anxiety को जड़ से खत्म कर देता है।
- Protection from Negative Energies: किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या Evil Eye (नजर दोष) इस कवच के तेज के सामने नहीं टिक पाती।
- Success in Litigation: यदि आप कोर्ट-कचहरी या विवादों में फंसे हैं, तो यह पाठ आपको Victory (विजय) दिलाने में सहायक है।
- Deep Devotion (Bhakti): चूंकि यह आनंद रामायण से है, इसका पाठ करने से न केवल हनुमान जी, बल्कि प्रभु श्री राम की कृपा भी सहज प्राप्त होती है।
- Mental Clarity: यह आपके Brain power and Focus को बढ़ाता है, जिससे कठिन निर्णय लेना आसान हो जाता है।
पाठ करने की सही विधि (Puja Vidhi & Rituals)
इस Effective Kavacham का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन चरणों का पालन करें:
- Preparation: मंगलवार (Tuesday) या शनिवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- Attire: सात्विक ऊर्जा के लिए लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- Offerings: हनुमान जी को लाल चंदन, सिंदूर और चमेली के तेल का दीपक अर्पित करें।
- Recitation: शांत मन से Shri Hanumat Kavacham 2 (Ananda Ramayane) का पाठ करें। यदि संभव हो, तो पाठ के बाद भगवान राम के नाम का 108 बार जाप अवश्य करें।
निष्कर्ष: Shri Hanumat Kavacham (Ananda Ramayane) केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि सुरक्षा का एक अभेद्य किला है। जो भक्त पूर्ण विश्वास के साथ इस कवच का पाठ करते हैं, उनके जीवन के समस्त संकट कपूर की तरह उड़ जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (5 Essential FAQs)
आनंद रामायण वाला हनुमान कवच अन्य कवचों से कैसे अलग है?
यह कवच अधिक Detail-oriented है और इसमें हनुमान जी के साथ-साथ राम भक्ति का भी पुट है। इसकी Vibrational frequency बहुत उच्च मानी जाती है।
क्या मैं इसे रोज पढ़ सकता हूँ?
जी हाँ, प्रतिदिन एक बार पाठ करना आपके जीवन में Positive Aura बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
क्या इस कवच से ग्रहों के दोष शांत होते हैं?
विशेष रूप से शनि (Saturn) और मंगल (Mars) के Negative impacts को शांत करने के लिए यह एक Proven spiritual remedy है।
क्या महिलाएं आनंद रामायण हनुमत् कवच का पाठ कर सकती हैं?
बिल्कुल, महिलाएं पूरी श्रद्धा और शुद्धता के नियमों का पालन करते हुए इस कवच का पाठ कर सकती हैं।
इस पाठ का सबसे अच्छा समय क्या है?
Brahma Muhurta (सूर्योदय से पहले) या सूर्यास्त के समय (Sandhya Kaal) इसका पाठ करना सबसे अधिक Effective होता है।
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