हनुमान जी की षोडशोपचार पूजा – समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति का शक्तिशाली मार्ग : हिंदू धर्म में भगवान हनुमान जी को भक्ति, शक्ति, निष्ठा और भगवान राम के परम भक्त के रूप में पूजा जाता है। उनकी पूजा-आराधना से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं, बुरी शक्तियों का नाश होता है और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
उनकी पूजा के कई विधान हैं, जिनमें षोडशोपचार हनुमान जी पूजा विधि एक अत्यंत शास्त्रोक्त, पूर्ण और फलदायी विधि मानी जाती है। “षोडशोपचार” का अर्थ है सोलह प्रकार के उपचारों या सामग्रियों द्वारा की जाने वाली पूजा।
यह पूजा विधि न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि जीवन की बाधाओं को दूर करके सफलता का मार्ग भी प्रशस्त करती है। इस लेख में, हम आपको षोडशोपचार हनुमान जी की पूजा विधि का विस्तृत, चरणबद्ध और सरल मार्गदर्शन देंगे, साथ ही एक उपयोगी पीडीएफ गाइड तक पहुँच भी प्रदान करेंगे।

षोडशोपचार हनुमान पूजा की तैयारी: आवश्यक सामग्री (Puja Ki Taiyari: Samagri)
पूजा शुरू करने से पहले निम्नलिखित सामग्री तैयार रखें। इनमें से अधिकांश सामग्री पूजा की दुकान पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
पूजा का स्थान और मुख्य सामग्री (Puja Sthal aur Mukhya Samagri)
- हनुमान जी की मूर्ति या चित्र (तांबे या पीतल की प्रतिमा शुभ मानी जाती है)।
- लाल या केसरिया रंग का आसन (कुशा आसन या चौकी)।
- लाल या केसरिया वस्त्र।
- सिंदूर, लाल चंदन और रोली।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण)।
- जल से भरा कलश, नारियल और आम के पत्ते।
सोलह उपचार की सामग्री (Solah Upchar Ki Samagri List)
षोडशोपचार पूजा के लिए निम्नलिखित 16 चीजों का होना आवश्यक है:
- आसन: पूजा के लिए बैठने हेतु आसन देना।
- स्वागत/आवाहन: देवता का आह्वान करना।
- पाद्य: चरण धोने के लिए जल।
- अर्घ्य: अतिथि सत्कार के लिए जल।
- आचमन: पीने के लिए जल।
- मधुपर्क: स्नान के लिए दूध-घी आदि।
- स्नान: पंचामृत या जल से स्नान कराना।
- वस्त्र: नए वस्त्र अर्पित करना।
- यज्ञोपवीत (जनेऊ): यज्ञोपवीत पहनाना।
- गंध: चंदन, केसर या इत्र लगाना।
- पुष्प: लाल या केसरिया फूल अर्पित करना (गुड़हल, गुलाब)।
- धूप: धूपबत्ती जलाना।
- दीप: घी का दीपक जलाना।
- नैवेद्य: भोग लगाना (बेसन के लड्डू, बूंदी, मालपुआ, केला)।
- ताम्बूल: पान, सुपारी और इलाइची।
- प्रदक्षिणा व नमस्कार: परिक्रमा कर प्रणाम करना।
षोडशोपचार हनुमान पूजा विधि: (Hanuman Puja Vidhi Step by Step)
अब हम षोडशोपचार हनुमान जी पूजा विधि के मुख्य चरणों को समझते हैं। सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर श्रद्धापूर्वक बैठ जाएं।
Step 1: संकल्प एवं आसन (Sankalp aur Aasan)
सर्वप्रथम हाथ में जल, फूल, अक्षत (चावल) और एक सिक्का लेकर संकल्प लें: “मम उपस्थित समस्त संकट निवारण, कार्यसिद्धि, एवं मंगलकामनार्थे श्री हनुमंत प्रसन्नतार्थे अहं षोडशोपचार पूजनं करिष्ये।“ इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित कर उन्हें आसन अर्पित करें।
Step 2: देवता का आह्वान से लेकर स्नान तक (Aavahan se Snan Tak)
- आवाहन: हनुमान जी को अपने हृदय में बुलाते हुए मंत्र पढ़ें – “आगच्छ परमं धाम रामदूत हनुमंत। पूजां गृहाण सुप्रीतो भव मे सन्निधौ सदा।।“
- पाद्य, अर्घ्य, आचमन: चरणों में जल (पाद्य), फिर अर्घ्य का जल और पीने के लिए जल (आचमन) अर्पित करें।
- स्नान: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से और फिर शुद्ध जल से हनुमान जी का स्नान कराएं। स्नान के समय “ऊँ हं हनुमते नमः“ मंत्र का जाप करें।
Step 3: वस्त्र से लेकर गंध-पुष्प तक (Vastra, Gandh, Pushp)
- स्नान के बाद हनुमान जी को लाल या केसरिया वस्त्र पहनाएं और यज्ञोपवीत (जनेऊ) अर्पित करें।
- इसके बाद उन्हें चंदन या सिंदूर का तिलक लगाएं। हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है।
- पुष्प अर्पण: लाल गुड़हल, गुलाब के फूल या पुष्पमाला अर्पित करें। “ऊँ अंजनीगर्भसंभूत मारुतात्मज हनुमते नमः” मंत्र बोलते हुए फूल चढ़ाएं।
Step 4: धूप, दीप एवं नैवेद्य (Dhup, Deep, Naivedya)
- धूप: धूपबत्ती जलाकर घुमाएं।
- दीप: घी का दीपक जलाएं। यह ज्ञान और अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।
- नैवेद्य (भोग): हनुमान जी को बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, केला, गुड़-चना या मीठे पकवान का भोग लगाएं। भोग लगाते समय मंत्र है – “नैवेद्यं गृह्यतां देव प्रसीद परमेश्वर।“
Step 5: आरती, प्रदक्षिणा और पूजा समापन (Aarti, Pradakshina, Samapan)
- ताम्बूल: पान, सुपारी और इलाइची अर्पित करें।
- आरती: “आरती कीजै हनुमान लला की…“ या “ऊँ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर…” आरती गाएं।
- प्रदक्षिणा व नमस्कार: हनुमान जी की प्रतिमा की पांच बार परिक्रमा करें और अंत में दंडवत प्रणाम करें।
- पूर्णाहुति: पूजा में प्रयुक्त सभी सामग्री का दान करें या किसी योग्य स्थान पर विसर्जित करें। भोग को प्रसाद के रूप में सभी में बांट दें।
Shodashopachar Hanuman Puja Vidhi PDF:
इस पूरी विधि को सदैव अपने पास रखने एवं सही मंत्रों के साथ पूजा करने के लिए एक प्रामाणिक पीडीएफ गाइड बहुत उपयोगी साबित होती है।
- पूजा का संपूर्ण विवरण हिंदी में।
- सभी मंत्र देवनागरी लिपि में उच्चारण सहित।
- सोलह उपचारों की क्रमबद्ध सूची।
- पूजा के शुभ मुहूर्त और विशेष दिनों (मंगलवार, शनिवार) का उल्लेख।
षोडशोपचार हनुमान पूजा का क्या है महत्व? (Shodashopachar Puja Ka Mahatva)
षोडशोपचार पूजा एक संपूर्ण एवं व्यवस्थित पूजा पद्धति है। इस विधि में देवता को सोलह विभिन्न प्रकार के उपचारों जैसे आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, फल, दक्षिणा और प्रदक्षिणा आदि से संपन्न किया जाता है। हनुमान जी की यह पूजा विशेष रूप से निम्नलिखित लाभ प्रदान करती है:
- संकट निवारण: शनि, राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव और जीवन के संकटों से मुक्ति।
- साहस और शक्ति की प्राप्ति: आत्मविश्वास, मानसिक व शारीरिक शक्ति में वृद्धि।
- भय का नाश: भूत-प्रेत, डर और चिंता से मुक्ति।
- कार्यसिद्धि: शिक्षा, व्यवसाय और किसी भी प्रयास में सफलता।
- रोगमुक्ति: गंभीर बीमारियों से उबरने में सहायक।
निष्कर्ष: भक्ति ही सर्वोपरि
षोडशोपचार हनुमान जी पूजा विधि एक ऐसी साधना है जो भक्त को व्यवस्थित ढंग से देव चरणों में समर्पित होने का अवसर देती है। यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम और श्रद्धा का समर्पण है। इस लेख में दी गई जानकारी और मार्गदर्शन आपको एक सफल पूजा करने में सहायक होगी। याद रखें, सभी उपचारों और सामग्रियों से भी बढ़कर एकाग्र चित्त और पवित्र हृदय से की गई सरल प्रार्थना भी हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs: Frequently Asked Questions)
षोडशोपचार हनुमान पूजा कब करनी चाहिए?
इस पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा हनुमान जयंती, रामनवमी और दीपावली जैसे पर्वों पर भी यह पूजा विशेष फलदायी होती है। संकटकाल में किसी भी दिन विधिपूर्वक यह पूजा की जा सकती है।
क्या घर पर ही षोडशोपचार पूजा कर सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। यदि आप श्रद्धा और विधि का पालन करते हुए पूरी तैयारी के साथ पूजा करें, तो घर पर भी यह पूजा पूर्ण फलदायी होती है। शुरुआत में किसी जानकार व्यक्ति का मार्गदर्शन ले सकते हैं या विश्वसनीय पीडीएफ गाइड का सहारा ले सकते हैं।
यदि पूजा में कोई चूक हो जाए तो क्या करें?
पूजा में सर्वाधिक महत्व श्रद्धा और भक्ति का है। यदि अनजाने में कोई चूक रह जाए या क्रम बदल जाए, तो घबराएं नहीं। हृदय से हनुमान जी से क्षमा मांगते हुए पूजा जारी रखें और अंत में प्रार्थना करें कि हे प्रभु, हमसे हुई किसी भी त्रुटि को क्षमा करें और हमारी भक्ति को स्वीकार करें। माना जाता है कि हनुमान जी अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
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