मंगलवार व्रत कथा क्या है और कैसे करें जानिए पूरी कथा और विधि: भगवान भोलेनाथ के ग्यारहवें अवतार कहे जाने वाले पवन पुत्र श्री हनुमान जी की व्रत लखनी पूजन करने और कथा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं । बजरंगबली को पराक्रम बल शक्ति साहस सेवा और भक्ति का आदर्श माना जाता है । पुराणों के अनुसार बजरंगबली को सकल गुण निधान भी कहा जाता है ।
यह है मंगलवार व्रत कथा
ॐ नमो भगवते हनुमते नमः।
बोलो पवनपुत्र हनुमान जी महाराज की जय।
भक्तों, एक समय की बात है। एक नगर में एक ब्राह्मण दंपति निवास करता था। दोनों पति-पत्नी बड़े ही प्रेम और सद्भाव से जीवन व्यतीत करते थे, परंतु संतान न होने के कारण उनका मन सदैव दुखी रहता था। अनेक वर्षों तक उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की, यज्ञ-दान किए, किंतु उनकी मनोकामना पूर्ण नहीं हो रही थी।
एक दिन किसी पुण्यात्मा ने उन्हें उपाय बताया कि यदि वे प्रत्येक मंगलवार श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान हनुमान जी की पूजा और व्रत करें, तो अवश्य ही उनके कष्ट दूर होंगे। यह सुनकर ब्राह्मण दंपति के मन में आशा जागी।
उस दिन से ब्राह्मण प्रत्येक मंगलवार ठीक एक समय पर हनुमान जी की पूजा करने लगा और उनकी पत्नी पूरे विधि-विधान से व्रत रखने लगी। पूजा के बाद हनुमान जी को भोग लगाया जाता और फिर परिवार भोजन करता। समय बीतने लगा, भक्ति और निष्ठा दिन-प्रतिदिन बढ़ती गई।
एक मंगलवार ऐसा आया जब किसी कारणवश ब्राह्मणी भोजन नहीं बना पाई और हनुमान जी को भोग नहीं लग सका। यह बात उसे भीतर तक पीड़ा देने लगी। उसी दिन उसने दृढ़ संकल्प लिया कि अगले मंगलवार वह किसी भी परिस्थिति में बिना भोग लगाए अन्न ग्रहण नहीं करेगी।
इस संकल्प के साथ वह छह दिनों तक निराहार रही। व्रत वाले दिन पूजा करते-करते वह मूर्छित होकर गिर पड़ी। भक्तों, यह सब पवनपुत्र हनुमान जी देख रहे थे। अपने भक्तों की ऐसी सच्ची भक्ति, त्याग और निष्ठा देखकर वे अत्यंत प्रसन्न हुए।
हनुमान जी ने कृपा करके उस दंपति को पुत्र-रत्न का आशीर्वाद दिया और कहा:
“यह बालक तुम्हारा सहारा बनेगा और तुम्हारी सेवा करेगा।”
जब ब्राह्मणी को होश आया तो उसने अपने पास एक सुंदर बालक को देखा। उसकी आँखों से आनंद के आँसू बह निकले। उसने उस बालक का नाम मंगल रखा।
कुछ समय बाद ब्राह्मण घर लौटा। उसने शिशु के रोने की आवाज सुनी और आश्चर्य से पत्नी से पूछा:
“यह बालक किसका है?”
ब्राह्मणी ने विनम्र भाव से कहा—
“मेरे व्रत और भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने हमें यह संतान दी है।”
परंतु ब्राह्मण को इस पर विश्वास नहीं हुआ। एक दिन जब ब्राह्मणी घर पर नहीं थी, तो उसने अज्ञानवश उस बालक को कुएँ में डाल दिया।
जब ब्राह्मणी लौटी तो व्याकुल होकर बोली:
“मंगल कहाँ है?”
उसी क्षण पीछे से बालक की मधुर आवाज आई:
“माँ, मैं यहाँ हूँ।”
यह देखकर ब्राह्मण स्तब्ध रह गया। उसी रात उसे स्वप्न में भगवान हनुमान जी के दर्शन हुए। हनुमान जी ने कहा—
“यह संतान तुम्हारी ही है। यह मेरी कृपा से तुम्हें प्राप्त हुई है।”
यह सुनते ही ब्राह्मण की आँखें खुल गईं, उसका हृदय पश्चाताप और आनंद से भर गया। उसने अपने किए पर क्षमा माँगी और उस दिन से वह भी पूरे विश्वास के साथ हनुमान जी का व्रत रखने लगा।
भक्तों, तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि जो भी श्रद्धा, निष्ठा और विश्वास के साथ भगवान हनुमान जी की पूजा और व्रत करता है, हनुमान जी उसकी हर सच्ची मनोकामना पूर्ण करते हैं।
हनुमान जी को दया, करुणा और भक्त-वत्सलता का प्रतीक माना गया है।
इसी के साथ कथा पूर्ण होती है।
बोलो बजरंगबली की जय। 🙏
बोलो संकटमोचन हनुमान जी महाराज की जय। 🚩
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जो लोग नहीं जानते उनके लिए बता दें कि हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयां गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखी हैं । इसी कड़ी में एक चौपाई है भी है।
चारों युग परताप तुम्हारा है , प्रसिद्ध जगत उजियारा ।
इस चौपाई का अर्थ है– हनुमान जी इकलौते ऐसे देवता हैं जो हर युग में संकटमोचक की तरह दुनिया में मौजूद रहेंगे । हनुमान जी को भोलेनाथ ने या आशीर्वाद दिया था कि आपको जगत कल्याण में संकटमोचक बनकर मौजूद रहना है । शास्त्रों में कहा गया है कि जो भी भक्त श्री हनुमान जी की सच्ची श्रद्धा और निष्ठा के साथ व्रत पूजन और कथा करता है उसे हर कष्ट से मुक्ति मिलती है और हनुमान जी संकटमोचक की तरह उसके संकट हर लेते हैं । आइए हम आपको बताते हैं कि आप कैसे मंगलवार के दिन पवन पुत्र श्री हनुमान जी की व्रत कथा और पूजन कर सकते हैं ।
मंगलवार व्रत और पूजा को क्यों और कब करना चाहिए:
सप्ताह के सातों दिनों में से मंगलवार बजरंगबली के लिए खास माना गया है । इसलिए खासतौर पर मंगलवार को ही हनुमान जी की पूजा और व्रत कथा करनी चाहिए । एक भक्त चंद्र मास के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से व्रत शुरु कर सकता है । कहा जाता है जब सूर्य उत्तरायण में होता है । तो इसे 21 सप्ताह तक जारी रखना चाहिए । इसी दिन मंगलवार को बजरंगबली की सुबह प्रातः स्नान करने के बाद शुद्ध कपड़े पहन कर अच्छी तरह पूजा भी करनी चाहिए । ऐसा करने से शारीरिक कष्ट आर्थिक स्थिति और बीमारी से छुटकारा मिल जाता है ।
Mangalwar vrat katha भक्तों द्वारा श्रद्धा और विधि-विधान से पढ़ी जाती है ताकि जीवन में सुख, शांति और मंगल प्राप्त हो। mangalwar ki vrat katha, mangalwar ka vrat katha का पाठ करने से कष्ट, रोग और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से Hanuman ji ki vrat katha का पाठ संध्या समय में अत्यंत फलदायी माना गया है। इस पेज पर श्रद्धालुओं को तथा mangalwar vrat katha pdf और mangalwar vrat katha pdf download की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे वे घर बैठे आसानी से व्रत कथा पढ़कर पूर्ण पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
मंगलवार व्रत करने की विधी:
यह बात सच है कि बजरंगबली ब्रह्मचारी हैं और जब भी इनकी पूजा अर्चना करें बहुत ही शुद्ध रूप से करें । आप जानते हैं मंगलवार व्रत विधि (mangalwar vrat katha vidhi) । सर्व सुख रक्त विकार तथा सम्मान प्राप्ति के लिए मंगलवार को व्रत रखना उत्तम माना गया है । इस व्रत में भक्तों को गेहूं और गुड़ का ही भोजन करना चाहिए ।
ऐसा माना गया है कि भोजन दिन में सिर्फ एक बार ही ग्रहण करना चाहिए वह भी शाम को पूजा समय के बाद । शास्त्रों में माना गया है कि यदि कोई भी 21 सप्ताह तक भगवान हनुमान जी का व्रत रखता है तो उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं । पूजा करते समय या ध्यान रखें बजरंगबली को लाल पुष्प चढ़ाएं । और खुद भक्त लाल वस्त्र धारण करें । इसके बाद हनुमान जी की कथा (mangalwar ke vrat ki katha) का पाठ करना चाहिए ।
Mangalwar Vrat Katha Full Images:

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FAQs Mangalwar Vrat Katha:
Mangalwar Vrat Katha क्या है और इसका पाठ क्यों किया जाता है?
Mangalwar vrat katha मंगलवार के दिन भगवान हनुमान एवं मंगल देव की कृपा प्राप्त करने के लिए पढ़ी जाती है। Mangalwar ki vrat katha का नियमित पाठ करने से कष्ट, रोग, भय और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है तथा मंगल कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
Mangalwar Pradosh Vrat Katha का महत्व क्या है?
Mangalwar Pradosh Vrat Katha का विशेष महत्व प्रदोष काल में माना गया है। pradosh vrat katha mangalwar ki संध्या समय में पढ़ने से शिव कृपा, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Mangalwar ka vrat katha और विधि क्या है?
Mangalwar ka vrat katha प्रातः स्नान के बाद व्रत संकल्प लेकर शुरू की जाती है। इसके बाद हनुमान जी की पूजा, दीपक जलाना, और Mangalwar vrat katha vidhi के अनुसार कथा का पाठ किया जाता है। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है।
Mangalwar vrat katha pdf कहाँ से डाउनलोड करें?
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Mangalwar ke vrat ki katha पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
Mangalwar ke vrat ki katha का श्रद्धा से पाठ करने से जीवन में मंगल, स्वास्थ्य लाभ, शत्रु बाधा से रक्षा और मानसिक शांति मिलती है। विशेष रूप से मंगलवार के दिन यह व्रत करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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